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Tuesday, June 21, 2011

बोल सुण्या जब साधू का



बोल सुण्या जब साधू का, खाटका लग्या गात के म्हां ।
पाटमदे झट चाल पङी, उनै भोजन लिया हाथ के म्हां ॥

उठ्ण लागी ल्हौर बदन मैं, जब नैनो से नैन लङी ।
मेरे पिया बिन सोचे समझे, या गलती करदी बोहोत बङी ॥
हिया उझळ कै आवण लाग्या, आंख्यां तै गई लाग झङी ।
हाथ जोङ कै पाटमदे झट, शीश झुका कै हुई खङी ॥

कह "लख्मीचन्द" न्यूँ बोली, तू क्युं ना रह्या साथ के म्हाँ ॥ पाटमदे झट चाल पङी...........

तळै खड्या क्युं रुके मारै चढ्ज्या जीने पर कै


तळै खड्या क्युं रुके मारै चढ्ज्या जीने पर कै ,
एक मुट्ठि मनै भिक्षा चहिए देज्या तळै उतर कै ।

सुपने आळी बात पिया मेरी बिल्कुल साची पाई,
बेटा कह कै भीख घालज्या जोग सफ़ल हो माई ।
बेटा क्युकर कहूँ तनै तू सगी नणंद का भाई,
उन नेगां नै भूल बिसरज्या दे छोड पहङी राही ॥

पिया सोने के मन्नै थाळ परोसे जीम लिये मन भर कै,
राख घोळकै पीज्यां साधू हर का नाम सुमर कै ॥ तळै खड्या क्युं रुके मारै.....

Monday, June 20, 2011

कान पङा लिये जोग ले लिया

कान पङा लिये जोग ले लिया, इब गैल गुरु की जाणा सै ।
अपणे हाथां जोग दिवाया इब के पछताणा सै ॥


धिंग्ताणे तै जोग दिवाया मेरे गळमैं घल्गि री माँ,
इब भजन करुँ और गुरु की सेवा याहे शिक्षा मिलगी री माँ ।
उल्टा घरनै चालूं कोन्या जै पेश मेरी कुछ चलगी री माँ,
इस विपदा नै ओटूंगा जै मेरे तन पै झिलगी री माँ॥


तन्नै कही थी उस तरियां तै इब मांग कै टुकङा खाणा सै । 
अपणे हाथां जोग दिवाया इब के पछताणा सै ॥